तहलीली रदीफ़
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ग़ज़ल कहने वाले रदीफ़ तो जानते हैं मगर तहलीली रदीफ़ से कम लोग वाक़िफ़ हैं। तो देखिये तहलीली रदीफ़ क्या होता है।
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जब रदीफ़ इस तरह से क़ाफिये के बाद आये कि वह क़ाफिये में जज़्ब हो जाए... सरल शब्दों में कहा जाए तो मिक्स (MIX) हो जाए तो ऐसे रदीफ़ को तहलीली रदीफ़ कहते हैं।
उदाहरण-1
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डाल दे साया अपने आँचल का।
नातवाँ हूँ कफ़न भी हो हल्का।।
-नासिख़
इस मतले के शेर से ये स्पष्ट है कि आँचल क़ाफ़िया है और "ल" उस क़ाफ़िये का हर्फ़े-रवी है तथा "का" रदीफ़ है। मिसरा सानी का हल्का शब्द ऐसा शब्द है जिसमे क़ाफ़िये के हर्फ़े-रवी "ल" के साथ रदीफ़ "का" बिलकुल चिपक कर यानी MIX होकर आ रहा है। अतः मिसरा सानी का "का" तहलीली रदीफ़ है।
उदाहरण-2
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इस क़दर होशियार तुम हो क़र।
राहे-उल्फ़त में खा रहे ठोकर।।
-जर्रार तिलहरी
यहाँ तहलीली रदीफ़ क्या है अब आप बताइये अगर समझ गए हैं तो...:)
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-कुँवर कुसुमेश सर के सौजन्य से
Saturday, 20 January 2018
ग़ज़ल संबंधी जानकारी
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