Saturday, 30 December 2017

ग़ज़ल

ख़ात्मा आरज़ू का कर डाला।
इस तरह दिल को हल्का कर डाला।।

चंद फ़िरक़ा ...पसन्द लोगो ने।
इस सियासत को गन्दा कर डाला।।

चंद लम्हात की .... ख़ुशी ने मुझे।
ग़मज़दा और ज़ियादा कर डाला।।

उसकी कुछ तो मुसीबतें होंगी।
जो अना का भी सौदा कर डाला।।

तब्सिरा कर रहे हैं अश्क़ मेरे।
हमने क्या तेरा बेजा कर डाला।।

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