Friday, 29 December 2017

ग़ज़ल

अना का अपनी जो बाज़ार में सौदा नही करते।
वो दौर ए मुफ़लिसी में भी कभी टूटा नही करते।।

तुम्हारे साथ रहने से ख़ुशी भी साथ रहती है।
कभी भी मुश्किलो में साथ हम छोड़ा नही करते।।

अभी भी राम लक्ष्मण का लहू बहता है रग रग में।
वचन देते हैं जिसको ,उससे हम धोखा नही करते।।

तुम्हारे शह्र की रौनक तो बेशक ख़ूब है लेकिन।
हम अपने गांव की तहज़ीब को भूला नही करते।।

भले ही शह्र में कोठी खड़ी हो उनके बेटे की।
मगर माँ-बाप अपनी देहरी छोड़ा नही करते।।

मुहब्बत में न इनके ज़ख़्म ए दिल को छेड़िये साहिब।
ये दीवाने हैं जो अंजाम की चिन्ता नही करते।।

हमारे दिल की बेचैनी हमारा हाल  कह देगी।
इसी डर से हम उनके सामने जाया नही करते।।

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