रंजो ग़म में दिल मेरा उलझा हुआ है।
अश्क़ से तकिया तभी भीगा हुआ है।।
तू समझ पाये भी कैसे ये रवानी।
इश्क़ का दरिया तेरा सूखा हुआ है।।
साथ रहकर साथ वो क्योंकर नही था।
हर ज़ुबां पे ये सवाल आया हुआ है।।
ग़म मुझे दो और तुम हद से ज़ियादा।
क्योंकि ये चेहरा मेरा हँसता हुआ है।।
रास्ते भटकूँगा आख़िर क्यों भला मैं।
वक़्त का पहलू मेरा देखा हुआ है।।
पी के सब कड़वाहटें इस ज़िन्दगी की।
दोस्तों लहजा मेरा ऐसा हुआ है।।
इस जहाँ की ये मुहब्बत देखकर भी।
रूद्र आँखों को मेरी ये क्या हुआ है।।
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