Thursday, 1 February 2018

ग़ज़ल

मुस्कुराहट किसी गमख़्वार को दे देता हूँ।
हर ख़ुशी अपनी तलबगार को दे देता हूँ।।

तन लगाता हूँ निवालों को कमाने के लिये।
और मन अपने मैं परिवार को दे देता हूँ।।

हर दुआ बनके दुआ करती है दूजे पे असर।
जब ये दौलत किसी बीमार को दे देता हूँ।।

दिल किसी का न दुखे मेरा यही मक़सद है।
इक  हवाला  यूँ मैं क़िरदार को  दे देता हूँ।।

जो भी मिलता है लगा लेता हूँ दिल से अपने।
प्यार कुछ ऐसे मैं लाचार को दे देता हूँ।।

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