Saturday, 30 December 2017

ग़ज़ल

ख़ात्मा आरज़ू का कर डाला।
इस तरह दिल को हल्का कर डाला।।

चंद फ़िरक़ा ...पसन्द लोगो ने।
इस सियासत को गन्दा कर डाला।।

चंद लम्हात की .... ख़ुशी ने मुझे।
ग़मज़दा और ज़ियादा कर डाला।।

उसकी कुछ तो मुसीबतें होंगी।
जो अना का भी सौदा कर डाला।।

तब्सिरा कर रहे हैं अश्क़ मेरे।
हमने क्या तेरा बेजा कर डाला।।

Friday, 29 December 2017

ग़ज़ल

अना का अपनी जो बाज़ार में सौदा नही करते।
वो दौर ए मुफ़लिसी में भी कभी टूटा नही करते।।

तुम्हारे साथ रहने से ख़ुशी भी साथ रहती है।
कभी भी मुश्किलो में साथ हम छोड़ा नही करते।।

अभी भी राम लक्ष्मण का लहू बहता है रग रग में।
वचन देते हैं जिसको ,उससे हम धोखा नही करते।।

तुम्हारे शह्र की रौनक तो बेशक ख़ूब है लेकिन।
हम अपने गांव की तहज़ीब को भूला नही करते।।

भले ही शह्र में कोठी खड़ी हो उनके बेटे की।
मगर माँ-बाप अपनी देहरी छोड़ा नही करते।।

मुहब्बत में न इनके ज़ख़्म ए दिल को छेड़िये साहिब।
ये दीवाने हैं जो अंजाम की चिन्ता नही करते।।

हमारे दिल की बेचैनी हमारा हाल  कह देगी।
इसी डर से हम उनके सामने जाया नही करते।।

Thursday, 28 December 2017

ग़ज़ल

हौसला जिसका बिखरता रह गया।
वो सदा मंज़िल का प्यासा रह गया।।

जो अना का सौदा कर पाया नही।
मुफ़लिसी का वो ही मारा रह गया।।

दिल तो आख़िर दिल है इसका क्या करें।
अपनो, ग़ैरों में उलझता रह गया।।

इश्क़ की चौसर भी साहिब ख़ूब है।
जो भी खेला वो ही फसता रह गया।।

क्यों बग़ावत पर उतर आई नदी।
जो समंदर आज प्यासा रह गया।।

सच की आख़िर ताजपोशी हो गयी।
झूठ हरसू गिड़गिड़ाता रह गया।।

अपनी ख़ुशियों में रहे मशगूल वो।
मैं ग़मे दिल ही सुनाता  रह गया।।

Wednesday, 27 December 2017

ग़ज़ल

न सोचा था बदल जाएगा इतना भी जुदा होकर।
मिला वो हमसे तो लेकिन मिला हमसे ख़फ़ा होकर।।

सदा कुचला गया हूँ मैं यहाँ अपने परायों में।
किसी का रास्ता होकर किसी का वास्ता होकर।।

ख़ुदाया बक्श दे इस ज़ीस्त को इक अज़्म ऐसा भी।
चलूँ मै साथ मंजिल तक सभी का रास्ता होकर।।

बुलन्दी के लिए पंछी ठिकाना छोड़ आया था।
मगर पछता रहा है आज वो घर से जुदा होकर।।

शराफत ,शर्म, ईमाँ, प्यार को यूँ ताक पे रख के।
करेगा क्या बता मुझको तू इतना भी बड़ा होकर।।

वो कहता है कि दुनिया के लिये तू आईना हो जा।
मैं कहता हूं न जीने देगी दुनिया आईना होकर।।

सभी के दिल में ये मासूम ख़्वाहिश पलती रहती है।
जिऊँ मैं ज़िन्दगी ताउम्र माँ का लाडला होकर।।