शेरो-शायरी में न और ना के इस्तेमाल पर बड़ी हाय तौबा मचाये हुए हैं बहुत से लोग। मैं अपने एक आलेख में पहले बता चुका हूँ कि हिंदी में तो न लिखा जा सकता है परन्तु उर्दू में न लिखते वक़्त ना ( نہ ) यानी नून के साथ हे मिलाकर ही लिखा जाता है। फिर न के लिए लघु तथा ना के लिए दीर्घ दोनों स्वीकार क्यों नहीं कर सकते।
जो लोग ना के प्रयोग को नकार दे रहे हैं वो ज़रा निम्न शेर भी देखें :-
-1-
इतना न दिल से मिलते,ना दिल को खो के देते ,
जैसा किया था हमने वैसा ही यार पाया।
-मीर तक़ी मीर
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-2-
गर उस तरफ़ बढ़ा किसी बेदादगर का हाथ।
बाला-ए-तन रहा न इधर ना उधर का हाथ।
-अनीस
सौजन्य से कुशमेश सर